Diwali 2024 kab ha. इस बार दो दिन मंनगी दिवाली
दिवाली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों मैं से एक है। के रोशनी और दीपक का त्यौहार है। यह कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। वर्ष 2024 में दिवाली 1 नवंबर 2022 शुक्रवार को मनाई जाएगी सबसे शुभ समय 5:36 बजे से शाम 6:16 बजे के बीच है
दिवाली के दिन क्या किया जाता है
दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जिसे "रोशनी का त्योहार" के रूप में जाना जाता है। यह अंधकार पर प्रकाश की, अज्ञान पर ज्ञान की, और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। दिवाली का उत्सव पाँच दिनों तक चलता है और इसमें घरों को साफ करना, दीये और मोमबत्तियां जलाना, रंगोली बनाना, मिठाइयाँ बांटना, और पटाखे फोड़ना शामिल है।
दिवाली मनाने का कारण
दिवाली का धार्मिक महत्व भी है। इस दिन भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है। इसके अलावा, यह धन की देवी लक्ष्मी और बुद्धि के देवता गणेश की पूजा का भी समय है। भारत के विभिन्न हिस्सों में दिवाली के अलग-अलग सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व हो सकता है
दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जिसे "रोशनी का त्योहार" कहा जाता है। यह उत्सव बुराई पर अच्छाई, अज्ञान पर ज्ञान, और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। 2024 में, दिवाली 1 नवंबर को मनाई जाएगी।
दिवाली का महत्व:
धार्मिक महत्व:
भगवान राम की वापसी: दिवाली का सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की है। उनके स्वागत के लिए नगरवासियों ने घी के दीयों से अयोध्या को रोशन किया था।
देवी लक्ष्मी की पूजा: इस दिन धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि देवी लक्ष्मी इसी दिन समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं।
भगवान गणेश की पूजा: बुद्धि और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा भी दिवाली पर की जाती है।
सांस्कृतिक महत्व:
प्रकाश और सजावट: दिवाली पर घरों और कार्यालयों को दीयों, मोमबत्तियों, और रंगोली से सजाया जाता है। यह प्रकाश अंधकार पर विजय का प्रतीक है।
मिठाइयाँ और उपहार: इस अवसर पर लोग मिठाइयाँ बांटते हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं, जो आपसी प्रेम और सौहार्द्र का प्रतीक है।
सामाजिक एकता: दिवाली सामाजिक और पारिवारिक एकता को भी बढ़ावा देती है। लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ मिलकर यह त्योहार मनाते हैं।
आर्थिक महत्व:
खरीदारी और व्यापार: दिवाली से पहले लोग नए कपड़े, आभूषण, और घरेलू सामान खरीदते हैं। यह व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है
दिवाली का महत्व
दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है और इसे "रोशनी का त्योहार" के रूप में जाना जाता है। इसका महत्व कई धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं में निहित है। यहाँ दिवाली का महत्व विस्तार से दिया गया है:
धार्मिक महत्व
भगवान राम की वापसी:
दिवाली का सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की है। अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत के लिए घी के दीयों से नगर को रोशन किया था।
देवी लक्ष्मी की पूजा:
दिवाली की रात को देवी लक्ष्मी, जो धन और समृद्धि की देवी हैं, की पूजा की जाती है। यह मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
भगवान गणेश की पूजा:
बुद्धि और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की भी दिवाली पर पूजा की जाती है, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
नरकासुर वध:
दक्षिण भारत में, दिवाली नरकासुर के वध की कथा से जुड़ी है। भगवान कृष्ण ने इस दिन नरकासुर का वध किया और 16,000 महिलाओं को मुक्त कराया।
सांस्कृतिक महत्व
प्रकाश और सजावट:
दिवाली पर घरों और कार्यालयों को दीयों, मोमबत्तियों, और रंगोली से सजाया जाता है। यह प्रकाश अंधकार पर विजय का प्रतीक है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
मिठाइयाँ और उपहार:
इस अवसर पर लोग मिठाइयाँ बांटते हैं

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